Thursday, 30 November 2017

जंग का एलान

क्यों रोता है अपनी हार पर
जीत, आसुओं से भीक मैं नहीं मिलेगी

आंधी ने ज़िन्दगी मैं भले ही तेहेलका लाया है
उसके इशारों पर चलने से सही राह नहीं मिलेगी

बादल कितने भी घने हो
सूरज तो कल फिर निकलेगा
फिर क्यों इस बरसात मैं मायूस होता है तू

वक़्त ने तुझे झुकाया है
हम उस वक़्त को झुकाएंगे
तूफ़ान में हम हवाओं से आगे निकल आएंगे

कल किस्मत ने अपना खेल खेला
अब सिक्का हम उछालेंगे
शुरुवात उसने की है, लेकिन पर्दा हम गिराएंगे



-SR.

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