वक़्त भी कैसे खेल खेलता है
जो नहीं मांगता उससे भर भर के देता है
पर जिसकी दुआ है उससे अंधेरे मैं छोड़ देता है
माना ये गम सभी के ज़िन्दगी का हिस्सा है
ना सिर्फ मेरा या तेरा पर सबका यही किस्सा है
पर कितना भी उससे समजाऊ
ना जाने क्यों ये दिल रोता है
हर पल एक नया मौसम है
ज़िन्दगी हर पल एक नयी पहेली है
वक़्त ने भले ही लिखे होंगे कहीं और इम्तिहान
आज नहीं तो कल, होगा अपनी मुट्ठी मैं ये जहान
साँसें चल रही है तो संघर्ष अभी बाकी है
लड़ाई भले तू हरा है पर युद्ध अभी बाकी है
घना अंधेरा, इतना सन्नाटा ही क्यों ने हो आज
पर नज़र मैं अगर तेरे ख्वाब अब भी ज़िंदा है
तो कल तेरी ही ज़मीन होगी और तेरा आसमान होगा
-SR.