Tuesday, 30 August 2016

वक़्त

हाथ आनेवाली ख़ुशी पल मैं छीन लेता है 
वक़्त भी कैसे खेल खेलता है

जो नहीं मांगता उससे भर भर के देता है
पर जिसकी दुआ है उससे अंधेरे मैं छोड़ देता है

माना ये गम सभी के ज़िन्दगी का हिस्सा है
ना सिर्फ मेरा या तेरा पर सबका यही किस्सा है

पर कितना भी उससे समजाऊ
ना जाने क्यों ये दिल रोता है

हर पल एक नया मौसम है
ज़िन्दगी हर पल एक नयी पहेली है

वक़्त ने भले ही लिखे होंगे कहीं और इम्तिहान
आज नहीं तो कल, होगा अपनी मुट्ठी मैं ये जहान

साँसें चल रही है तो संघर्ष अभी बाकी है
लड़ाई भले तू हरा है पर युद्ध अभी बाकी है

घना अंधेरा, इतना सन्नाटा ही क्यों ने हो आज
पर नज़र मैं अगर तेरे ख्वाब अब भी ज़िंदा है
तो कल तेरी ही ज़मीन होगी और तेरा आसमान होगा  



-SR.

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