Saturday, 27 May 2017

बीते पल

ना जाने क्यूं वक़्त थम सा जाता है
बीते हुए दीनो की तस्वीर देखकर
दिल खुद ब खुद मुस्कुराता है || [१]

हवा के झोंके, ज़िन्दगी के वो पन्ने
फिर आखों के सामने ले आता है
सब कुछ भुलाकर चेहरे पर एक हसीं छोड़ जाता है || [२]

उस तस्वीर को दोबारा जीना शायद आज संभव नहीं
ये तथ्य वो जानता है
फिर भी एक बार और कोशिश करने को
ना जाने क्यों आज दिल चाहता है || [३]

हर गम मैं साथ देंगे ये सभी ने कहा था
कुछ देर अँधेरा क्या हुवा
सभी ने अपने रास्ते बदल दिए || [४]

एहसास तो आज सभी के दिल को छु जाता है
अपने अहंकार के पार अगर झाका होता
तो शायद आज भी वो रिश्ता ज़िंदा होता || [५]

वक़्त ने जिन रिश्तों को तोड़ दिया
उसे अपने दिल मैं तुम टूटने ना देना || [६]

कभी राह मैं यूँही मुलाक़ात हो जाए
उस दोस्ती के खातिर, एक बार
तुम मुस्कुरा ज़रूर देना || [७]



-SR.

कुछ पल

कुछ पलो के लिए
सारे गम भूलकर
हसने की कोशिश कर रहा था ||

सवालों ने अपना रास्ता
मुझतक का खोज ही लिया || [१]

कुछ पलो के लिए
सारे दर्द भूलकर
चलने की कोशिश कर रहा था ||

दुनियादारी की ठोकरों ने
फिर चौराहे पे लाकर खड़ा कर दिया || [२]

उस बीते हुए कल की हार
कुछ पलो के लिए भूलकर
फिर एक कोशिश करने चला था ||

वक़्त ने उस राह का दीपक
जलने से पेहले ही बुजा दिया || [३]


-SR.

Monday, 8 May 2017

Why

Why do we feel sad
When we already
Knew the facts

Why do we feel broken
When someone points
That has already sunken

Why do we fall
When we knew
What was coming

Why do our eyes get teary
When everything around us
Was already dreary

-SR.