जिसे पीछे छोड़ आये थे हम
वह तो साये की तरह साथ ही था
जशन जिस जीत का मनाया
आज उसीके हार का सेहरा सर चढ़ गया
कर्म तो जायज़ ही थे
ईमानदारी और निष्ठां से भरे थे
फिर न जाने क्यूं वक़्त ने मुँह फेर लिया
जिसका डर था उसे ही सच बना दिया
संघर्ष में कोई कसर नहीं रखी
फिर क्यूं सूरज बादलों के पीछे छिप गया
तूफ़ान से कश्ती डटकर निकाली
पर किनारा आते ही किस्मत ने साथ छोड़ दिया
-SR.
वह तो साये की तरह साथ ही था
जशन जिस जीत का मनाया
आज उसीके हार का सेहरा सर चढ़ गया
कर्म तो जायज़ ही थे
ईमानदारी और निष्ठां से भरे थे
फिर न जाने क्यूं वक़्त ने मुँह फेर लिया
जिसका डर था उसे ही सच बना दिया
संघर्ष में कोई कसर नहीं रखी
फिर क्यूं सूरज बादलों के पीछे छिप गया
तूफ़ान से कश्ती डटकर निकाली
पर किनारा आते ही किस्मत ने साथ छोड़ दिया
-SR.
No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.