Tuesday, 6 March 2018

ना जाने क्यों


ना जाने क्यों ये खयाल आया
कल की सोचकर दिल घबरया

कोशिश तो हुमने पुरी की है
बताये हुए रास्तो के अलावा नए रास्ते भी खोजकर दिए है

लेकिन अंतिम फैस्ले की घडी जब आयी
तब उस पल की सोचकर दिल आज घबरया

कदम मंजिल की तरफ बडते समय
राह मै मिली मुश्किलों को एक जरीया बनाया

पर कश्टी को जब किनारा मेहसुस हुआ
तब ना जाने क्यों लंगर लगाने को आज दिल घबरया

जो कुछ कल खोया वही सिर्फ पाना चाहा
पाने के जुनून मै कभी किसीका दिल नही दुखाया

फिर ना जाने क्यों कल की सोचकर 
दिल आज घबरया



-SR.

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