ना जाने क्यों ये
खयाल आया
कल की सोचकर दिल
घबरया
कोशिश
तो हुमने पुरी की है
बताये
हुए रास्तो के अलावा नए
रास्ते भी खोजकर दिए
है
लेकिन
अंतिम फैस्ले की घडी जब
आयी
तब उस पल की
सोचकर दिल आज घबरया
कदम
मंजिल की तरफ बडते
समय
राह
मै मिली मुश्किलों को
एक जरीया बनाया
पर कश्टी को जब किनारा
मेहसुस हुआ
तब ना जाने क्यों
लंगर लगाने को आज दिल
घबरया
जो कुछ कल खोया
वही सिर्फ पाना चाहा
पाने
के जुनून मै कभी किसीका
दिल नही दुखाया
फिर
ना जाने क्यों कल
की सोचकर
दिल
आज घबरया
-SR.
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