ना जाने क्यों मुझे ऐसा लगता है
शायद ये अँधेरा कुछ मुझसे केहता है
रास्ता कहीं भटक न जाऊं
इसलिए काले आइने मैं दो पल मेरे लिए रखता है
युही हम रात को कोसते है
सूरज की मोह मैं चांदनी का मजा खो देते है
कदम तो अभी बाहर निकले है
कारवाँ तो सेकड़ो और भी है
तू मुसाफिर है, तुझे सिर्फ चलना है
समय की इस परीक्षा मैं तुझे भी खड़ा उतरना है
तेरे हौसलो मैं अगर जान है
तो रास्ता तुझे ज़रूर मिलेगा
निशाने पर अगर तेरे आसमान है
तो सितारों मैं तो जरूर गिरेगा
भले ही हो आज अँधेरा बहुत, पर सूरज जरूर निकलेगा
ये मौसम भी बदलेगा और वक़्त फिर झूम उठेगा
-SR.
शायद ये अँधेरा कुछ मुझसे केहता है
रास्ता कहीं भटक न जाऊं
इसलिए काले आइने मैं दो पल मेरे लिए रखता है
युही हम रात को कोसते है
सूरज की मोह मैं चांदनी का मजा खो देते है
कदम तो अभी बाहर निकले है
कारवाँ तो सेकड़ो और भी है
तू मुसाफिर है, तुझे सिर्फ चलना है
समय की इस परीक्षा मैं तुझे भी खड़ा उतरना है
तेरे हौसलो मैं अगर जान है
तो रास्ता तुझे ज़रूर मिलेगा
निशाने पर अगर तेरे आसमान है
तो सितारों मैं तो जरूर गिरेगा
भले ही हो आज अँधेरा बहुत, पर सूरज जरूर निकलेगा
ये मौसम भी बदलेगा और वक़्त फिर झूम उठेगा
-SR.
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